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कोरोनावायरस : क्या धर्म छुट्टी पर और विज्ञान ड्यूटी पर है?

  • अभिमत
  • अभिषेक शुक्ल | अध्ययन 3 मिनट | अपडेट किया गया: May 3, 2020, 6:31 a.m.




सनातन धर्म की शिक्षा विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म पालन करने की रही है इसलिए इतनी तकलीफ उठाने के बाद भी हमारे डाक्टर अपना धर्म का पालन कर रहे हैं। विज्ञान ड्यूटी पर है तो धर्म भी है, पर हाशिये पर लटकी उन लोगों की सोच है जो महामारी में भी प्रोपगंडा की रोटियाँ सेकने से बाज नहीं आ रहे।




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कोरोनावायरस के चलते बहुत से तथाकथित बुद्धिजीवी आज कल कहते पाये जा रहे हैं की धर्म छुट्टी पर और विज्ञान ड्यूटी पर है, साथ साथ धर्म, कर्तव्य, कर्म और जिम्मेदारी की कम जानकारी रखने वाले ज्यादातर भारतीय इसका शिकार हुए जा रहे हैं और धडल्ले से इसका सोशल मीडिया पर मंदिर या गुरुद्वारे की तस्वीर लगा कर प्रचार कर के वामपंथियों द्वारा फैलाये इस षडयंत्र में फँसते जा रहे हैं ।

अब सवाल ये उठता है कि धर्म आखिर है क्या? सनातन धर्म के संस्कार क्या है? सनातन धर्म की माने तो अपने कर्तव्य का हर पल निष्ठापूर्वक पालन करना ही धर्म है । श्रीमदभगवद्गीता के अनुसार धर्म के 4 चरण हैं पहला कर्म, दूसरा ज्ञान, तीसरा ध्यान और चौथा भक्ति, आप कुछ भी करते हो वह सब कुछ इन 4 चरणों में ही संभव है ।

उदाहरण के लिए मान लीजिए, यदी आप एक चिकित्सक यानी डाक्टर हैं तो आपका धर्म है आपके मरीजों का पूरी निष्ठा से इलाज करना फिर चाहे परिस्थितियां कैसी भी क्यों ना हो, इलाज करते समय आप प्रथम चरण में अपने कर्म करेंगे, कर्म करने के लिए आप प्राप्त ज्ञान के बारे में सोचेंगे और ध्यान लगायेंगे जिससे आप सही तरीके से इलाज कर पायें, कर्म, ज्ञान और ध्यान का आप तब तक पालन नहीं कर पायेंगे जब तक डाक्टरी विद्या की आपने मन से भक्ति ना करी हो।

कोरोनावायरस संक्रमण के उपचार हेतु सभी डाक्टर अपने धर्म का पालन कर रहे हैं और इसके विपरीत बहुत से जाहिल मरीज डाक्टरों पर थूक रहे हैं तो कही से खबरें आ रही हैं कि मरीज बोतल में पेशाब भर के फेक रहे हैं या कही नंगे घूमते हुए नर्स को अश्लील इशारे कर रहे हैं। हो सकता है उन मरीजों का धर्म उन्हें ये सब करने की सलाह देता हो मगर सनातन धर्म की शिक्षा विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म पालन करने की रही है इसलिए इतनी तकलीफ उठाने के बाद भी हमारे डाक्टर अपना धर्म का पालन कर रहे हैं तो आप कैसे यह कह सकते हैं की धर्म छुट्टी पर है ? सनातन धर्म के हिसाब से धर्म और विज्ञान कभी अलग हो ही नहीं सकते।

मुझे खुशी है कि हमारे सनातन सभ्यता में कभी पुलिस पर पत्थर नहीं चलाते, नर्सों के आगे नंगे नहीं हो जाते, ना ही फल सब्जियों पर पेशाब छिड़क के या थूक कर बेचते हैं, बल्कि सनातन संस्कृति की शिक्षा और संस्कार कहते हैं, “।।ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।।“, अर्थात "सभी सुखी और रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।" विज्ञान तो बस धर्म की एक छोटी सी कड़ी है। विज्ञान ड्यूटी पर है तो धर्म भी है, पर हाशिये पर लटकी उन लोगों की सोच है जो महामारी में भी प्रोपगंडा की रोटियाँ सेकने से बाज नहीं आ रहे।

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