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सैनिक के उपर थूकने वाले लोग क्या सैनिक को समझ पा रहे हैं?

  • देश
  • चमन सिंह | अध्ययन 3 मिनट | अपडेट किया गया: May 1, 2020, 3:06 p.m.




कोरोना एक बीमारी तो है ही, साथ ही लोगों के अंदर पनप रहे एक मानसिक संक्रमित कीड़े की पहचान कराने वाली एक बीमारी है| अपने एजेंडा के मद में चूर होकर आप देश के रक्षक का योगदान मत भूलिए| नुकसान आपका ही है|




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देश के बॉर्डर पर खुद को चट्टान की भाँति खड़ा रखने वाला सैनिक अपने घर पहुँचने पर मोम का पुतला बन जाता है और हर पल हर परिस्थिति मे पिघल ही जाता है, चाहे वो उस वक्त हो जब वो अपने घर पहुँचता है और उसका बच्चा या बच्ची समझने के लायक हो जाते हैं| मगर खुद के पापा को पहचान नही पाते और देखकर एक ऐसी चिंता मे पड जाते हैं कि वो चिंतन उनके चेहरे पर पूरी तरह से झलकता है और उस चिंतन को देख उस पिता का दिल एक बार तो द्रवित हो जाता है और आँसू बनकर आँखों मे छा जाते हैं|

माँ को देखे तो अरसा हो गया है उसकी गोद मे सर रखे न जाने कितने साल जैसे बीत गए, बालों मे तेल की मालिश न जाने कितने साल से नही हुई और माँ से गले लगकर रोए न जाने कितना वक्त हो चला|  पिता जी के पैरों को छूकर आशीर्वाद लिए न जाने कितना वक्त हो गया, साथ मे खेतों मे पगडंडियों पर चले और खेतों मे पानी लगाए न जाने कितना वक्त हो चला| बीवी तो जैसे बस शादी के सात फेरों की ही संगिनी थी उसके पश्चात तो जैसे उसका वो कर्ज़दार बन गया हो और कर्ज़दार उसके साथ न बिताए गए वक्त का हो या दुःख सुख मे साथ न निभा पाने की कमी से हो| बहन की राखी हर साल पहुँचती थी मगर उसका उपहार का कर्जदार रह जाना भी उसको द्रवित कर देता है, गाँव के हर बुज़ुर्ग, नवजवान या बच्चे से उसका रिश्ता है जिसको वो निभा नही पाया देश की सेवा मे खुद को न्यौछावर कर देने वाला सैनिक आज घर आकर घर की दहलीज़ को छूते ही सारा कर्ज आँखों से पानी की भाँति निकल रहा होता है...

सारी परिस्थितियों के बीच पुनः वो कसम परेड के वक्त वाली कसम उस सैनिक को थोड़ा दृढ़ता और साहस देती है और प्रसन्न होकर घर की दहलीज़ को पार करता है। कोरोना एक बीमारी तो है ही, साथ ही लोगों के अंदर पनप रहे एक मानसिक संक्रमित कीड़े की पहचान कराने वाली एक बीमारी है| लोग इतने उपद्रवी और प्रदूषित हो गए हैं, ये कोरोना के आने से ही पता चला|

किसी सैनिक या डॉक्टर या पुलिसवाले पर जो अपना समाज के प्रति धर्म निभा रहा है, के उपर थूकना एक ऐसा जघन्य अपराध है जो शायद जिंदगी मे कभी माफ़ नही किया जा सकता| साथ ही उस इंसान के उपर थूकना जो आपकी सुरक्षा और स्वास्थ की सारी सेवाएँ उपलब्ध कराता है, हाँ शायद हो सकता है आपको थूककर अपार ख़ुशी मिली होगी मग़र उस सैनिक की व्यथा आप शायद नही जानते वो किस तरह की परिस्थितियों से जूझ रहा होता है| अपने एजेंडा के मद में चूर होकर आप देश के रक्षक का योगदान मत भूलिए| नुकसान आपका ही है|

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