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ओटीटी प्लेटफार्म पर अब होगा नियंत्रण, फेक न्यूज पर कार्यवाही करेगी सरकार

  • देश
  • तितिक्षा | अध्ययन 5 मिनट | अपडेट किया गया: Feb. 25, 2021, 8:11 p.m.




केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि भारत में सोशल मीडिया एजेंसियों के कार्यों पर नियंत्रण करना अब अनिवार्य हो गया है। इस उद्देश्य से सरकार ने एक त्वरित शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना का आह्वान किया है। फेक न्यूज़ पर भी कसी जाएगी लगाम, होगी कार्यवाही।




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गृहमंत्री अमित शाह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट करके बताया कि सरकार नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।



सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए आज भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत नई गाइडलाइन के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे इस प्रकार हैं:-

१. अब स्त्री के किसी भी फ़ोटो पर मोरफिंग/अब्यूज़, या दुरुपयोग या उसके फोटो के स्क्रीनशॉट का उपयोग किया गया तो 24 घंटे में वो पोस्ट डिलीट कर दी जाएगी और कंपलेन रजिस्टर होने पर 15 दिन के अंदर उस व्यक्ति को दंड का प्रावधान किया जाएगा, जिसकी लघुत्तम दंड संहिता 5 वर्ष तक की जेल है।

२. बंधारण और कानून के खिलाफ़ पोस्ट या फेक न्यूज़ एवं चाइल्ड पोर्नोग्राफी, स्त्री शोषण, आदि का सब से पहला कंटेंट क्रिएटर, जिसने वह पोस्ट बनाई होगी अथवा डाली होगी उस पर कानूनी कार्यवाही होगी और वह पोस्ट करने वाले को दंडनीय धाराएं लगाई जाएगी।

३. सोशल मीडिया प्रोवाइडर कंपनी अब से आप की हर पोस्ट और कंटेंट के लिए तीन स्तरीय जांच और समितियां बनाएगी, जो कंप्लेन आने पर जांच भी करेगी और उचित कार्यवाही भी।

ott बिल का ड्राफ्ट, सौजन्य : पिआइबी इंडिया

४. ऑनलाइन हैरेसमेंट, स्त्री के विरुद्ध सेक्सुअल टिप्पणी करना अब पांच साल की दंडनीय धारा के आईटी एक्ट के तहत कानूनी अपराध होगा।

५. ओटीटी प्लेटफॉर्म अब सरकारी दायरे के भीतर होंगे सेंसर बोर्ड की तरह आयु अनुसार कंटेंट की रचना और वर्गीकरण करना होगा।

६. ऑनलाइन न्यूज पोर्टल के रचैता को अपनी सही जानकारी साझा करनी होगी। डिस्क्लोजर अनिवार्य होगा। फेक न्यूज़ फैलाने पर और सख्ती से कारवाई की जाएगी।

७. अब तक निरंकुश सोशल मीडिया पर सरकार मंत्रालय के प्रयासों से यूजर के हितों का ध्यान रखते हुए यूजर पर नियंत्रण रख सकेगी।

८. जातिगत दुर्भावना, भारत के मूलभूत बंधारणीय अधिकार (फंडामेंटल राइट्स) आदि पर कमेंट अथवा पोस्ट करना कानूनी अपराध है ही। साथ ही फ्रीडम ऑफ स्पीच, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन के नाम पर ऐसा करना इस लिए ठीक नहीं होगा क्योंकि इंटरनेट फ्रीडम ऑफ स्पीच और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं है अपितु फ्रीडम ऑफ स्पीच और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के अंतर्गत इंटरनेट का उपयोग होता है इस लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सिकंजा कसना गैर बंधारणीय नहीं है।

९. फेक एकाउंट पर कार्यवाही होगी।

आज तो बस गाइडलाइन आई है, पर केंद्रीय मंत्री ने मीडिया को बताया कि तीन महीनो के भीतर यह कानून बनाकर पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

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